Who are teaching to our children currently, आज हमारे बच्चो को कौन संस्कार दे रहा है "माँ, दादीमा या


Who are teaching to our children currentl

आज हमारे बच्चो को कौन संस्कार दे रहा है "माँ, दादीमा या फिर " सिनेमा "
जय श्री कृष्णा
भारतीय संस्कृति कि विदेशों में पूजा होती है, भारत विश्वगुरु था है और हमेशा रहेगा| पर ये क्या हम लोग तो खुद ही हमारी संस्कृति को भूलते जा रहे है | आज के माता पिता आधुनिकता की होड़ में अपने बच्चो को अपनी संस्कृति का ज्ञान भी नहीं दे रहे बल्कि टी. वी. सिनेमा जेसे गलत साधनों की तरफ प्रेषित कर उनका और देश का भविष्य भी ख़राब कर रहे है
आप सोच रहे होंगे कि मैं कहना क्या चाहता हूँ
मैं सिर्फ यही पूछ रहा हूँ कि आज हमारे बच्चो को कौन संस्कार दे रहा है "माँ, दादीमा या फिर " सिनेमा " आप ही बताइए क्या आप जानते हैं देश कि 100 प्रतिशत जनता में से सिर्फ 10 प्रतिशत लोग ही भारतीय प्राचीन संस्कृति के बारे में जानते हैं और उसके अनुसार जीवन निर्वाह कर रहे है | किन्तु 90 प्रतिशत लोगो को तो पता ही नहीं कि भारतीय संस्कृति कितनी मूल्यवान है

हिन्दुस्तान में हिन्दू संस्कृति में सबसे अच्छी बात है यहाँ के रिश्ते नाते, परंपरा, अतिथि सत्कार कि परंपरा और सबसे अच्छी बात है यहाँ हिन्दू धर्म के "सोलह संस्कार" मनुष्य के जन्म से लेकर मृत्युपर्यंत तक कुल सोलह संस्कार होते हैं जेसे गोद भराई, नामकरण संस्कार, मुंडन संस्कार, यज्ञोपवित संस्कार, विवाह संस्कार एवं अंतिम संस्कार जेसे कई संस्कार मानव जीवन को संयमित एवं संस्कारित बनाते हैं जिससे उन्हें रिश्ते नाते और परंपरा का निर्वाह करते हुए मोक्ष कि प्राप्ति होती है| हिन्दुस्तान में आज भी सिर्फ 10 प्रतिशत लोगो को ही संस्कारों के बारे में पूर्ण ज्ञान हो सकता है जबकि 90 प्रतिशत लोगो को तो सोलह संस्कारों के नाम भी याद नहीं होंगे | वेसे विदेशो मैं तो संस्कृति का सवाल ही पैदा नहीं होता क्योंकि वहां तो 70 प्रतिशत बच्चो को तो ये भी नहीं पता कि उनके पिता कौन है क्योंकि वहां कि संस्कृति में रिश्ते नाते ज्यादा मायने नहीं रखते | हिन्दुस्तान में तो विवाह एक संस्कार है जो सात जन्मो के बंधन कि तरह मन जाता है जबकि विदेशो में तो शादी का ज्यादा महत्त्व नहीं है ज्यादा से ज्यादा सेक्स का license मात्र बनकर रह गया है अब आप ही सोचिये क्या ये हमारे देश के लिए विचारनीय बात नहीं है जब जन्म से ही माँ बाप आधुनिकता कि होड़ में अपने बच्चो को टी.वी. और सिनेमा से संस्कार दिलाएंगे तो फिर अब यदि आये दिन बलात्कार और हिंसा जेसी घटनाएं होती है, आये दिन अखबार में पढने को मिलता है कि

"बेटे ने माँ कि हत्या करी,

विवाहिता अपने प्रेमी के साथ फरार,

पिता ही करता रहा ३ साल तक बेटी का बलात्कार,

निठारी हत्याकांड,

घर के सबसे विश्वसनीय नोकर ने किया मालिक का खून,

नाजायज संबंधो के कारण पति ने कि पत्नी के हत्या"

इन सब ख़बरों का जिम्मेदार कौन है ??

जिन बच्चो को चड्डी पहनना ठीक से नहीं आता उन्हें सेक्स के बारे में सब कुछ पता है, क्यों ?

युवा वर्ग के कई बिगडेल बच्चे अपने ही घर के ओरतो को बुरी निग़ाहों से देखते हैं क्यों ?

अश्लीलता, असामाजिकता, परंपराविहीन संस्कृति, पाश्चात्य संस्कृति की नक़ल, हिंसा, दहेज़ हत्या, अराजकता आदि का जिम्मेदार कौन है ?

श्रीराम के भाई लक्ष्मण से जब उनकी भाभी के जेवर पहचानने के लिए कहा तो उन्होंने कहा कि भाभी तो माँ सामान है मैंने तो कभी अपनी भाभी जी मुख के दर्शन नहीं किये उनके चरणों में प्रणाम करता हूँ तो केवल उनके नुपुर को पहचान सकता हूँ |

क्या आज श्री राम जेसा पुत्र, सीता मैया जेसी पत्नी, और लक्ष्मण जेसा भाई किसी भी समाज में मिल सकता है ????

नहीं न ??

इन सब बातों पर मनन करने पर एक ही सवाल में इसका उत्तर छिपा है और वो है

"आज हमारे बच्चो को कौन संस्कार दे रहा है "माँ, दादीमा या फिर " सिनेमा ""

अब भी वक़्त है संभल जाओ पाश्चात्य संस्कृति से अगर कुछ ग्रहण करना है तो अच्छाइयां ग्रहण करो | नक़ल मत करो |
अपने बच्चो को दादीमाँ और माँ के संस्कार जरुर दिलवाइए
और वेसे भी जो माँ बाप बचपन में अपने बच्चों को हाथ पकड़ कर मंदिर ले जाते हैं वही बच्चे बुढ़ापे में माँ बाप को तीर्थ यात्रा करवाते हैं
लेकिन जो माँ बाप अपने बच्चों को बचपन में संस्कार देने कि बजाय होस्टल में रखवा देते हैं वही बच्चे बुढ़ापे में अपने माता पिता को वृद्धाश्रम में दाल देते हैं.


Related Articles

More articles: Pune Culture Change your life and world

Comments

Author: Kailash Chandra Ladha15 Nov 2010 Member Level: Gold   Points : 1

jai shree krishna

kuchh samajh me aaya ki nahi ???
abhi bhi waqt hai...



  • Do not include your name, "with regards" etc in the comment. Write detailed comment, relevant to the topic.
  • No HTML formatting and links to other web sites are allowed.
  • This is a strictly moderated site. Absolutely no spam allowed.
  • Name:
    Email: